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परंपरागत खेती करने के फायदे और नुकसान क्या हैं?

परम्परागत खेती के फायदे और नुकसान

पारंपरागत खेती फसलों को विकसित करने के लिए आधुनिक तरीकों का उपयोग करने वाली कृषि है. यह उन वनस्पति एवं भोजन उत्पादन की मुख्य विधि है, जिसे आम तौर पर हम खाते हैं. यह कृषि की विधि सिंथेटिक रासायनिक फ़र्टिलाइज़र्स, रसायन – आधारित प्रजातियों पर आक्रमण के नियंत्रण और जेनेटिकली रूप से संशोधित जीवों के उपयोग पर निर्भर करती है. परंपरागत खेती, उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के लिए इसके लाभ के साथ ही इसकी उपलब्धता एवं मूल्य के कारण सबसे अधिक प्रचलित कृषि विधियों में से एक है. आधुनिक समय में परम्परागत खेती को विभिन्न कारणों से लाभकारी माना जाता है, किन्तु इसके लाभ के साथ – साथ इसके कुछ नुकसान भी हैं. यहाँ इस खेती के फायदे एवं नुकसान दिए जा रहे है –

परंपरागत खेती के फायदे (Conventional Farming Advantages)

 

यह फसलों की पैदावार को बढ़ाती है :- यह खेती किसानों के लिए उच्च ओवरआल पैदावार को बढ़ाने में मदद करती है, ताकि प्राकृतिक परिस्थितियों में कम फसलें ख़राब हों. फसलों के मैदानों पर लागू करने वाले रसायनों से कीटों को कम करने में, फसलों में अधिक पानी बनाये रखने में बढ़ावा देने में एवं घासों को निकलने में मदद मिलती हैं.

 

यह फसलों को और अधिक उपयोगी बनाती है :- जेनेटिकली रूप से संशोधित फसलें न केवल ख़राब होने वाली फसलों को बचाने में मदद करती है, बल्कि ये उसे और भी अधिक फलदायी बनाती है. इस खेती के कारण मक्का के दाने को बड़े होने में और गेंहू के क्षेत्र को लोकल फंगस से बचाने में मदद मिलती है. जेनेटिकली रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ पोषक तत्वों से भरे होते हैं.

 

यह किसनों को दुनिया को खाना खिलाने में सक्षम बनाती है :- दुनिया में इतनी अधिक आबादी है कि इसका आंकड़ा सन 2050 में 10 बिलियन तक पहुंच सकता है. सभी जमीन भोजन के उत्पादन के लिए उपयुक्त नहीं होती है. अतः उस समय तक बहुत कम भूमि उपलब्ध होगी, क्योकि लोगों को रहने के लिए घर की आवश्यकता होती है. ऐसे में परंपरागत खेती में पूरी दुनिया को खिलाने लायक भोजन का निर्माण करने की संभावना है, क्योंकि यह विधि भूमि को अधिक प्रोडक्टिव बनाती है.

 

कम लागत और उच्च लाभ :- इस खेती का उपयोग करने वाले किसानों के अनुसार, इस विधि के लाभों में से एक लाभ इसकी सस्ती लागत है. इस खेती में सिंथेटिक रसायन फ़र्टिलाइज़र और सीवेज स्लज का उपयोग होता है जोकि आर्गेनिक खेती के मुकाबलें बहुत सस्ता होता है. इससे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर अधिक लाभ कमा सकते हैं. यही इस विधि को आकर्षक बनाता है.

 

अधिक नौकरी के अवसर :- ऐसा मानाजाता हैं कि परंपरागत खेती, मजदूर वर्ग के लिए रोजगार के अवसर देती है. चूंकि इस खेती में बड़े क्षेत्र में अधिक उत्पादन किया जाता हैं जिससे खेतों में काम करने के लिए अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती हैं. इससे किसानों को नौकरियों के अवसर प्रदान होते हैं. इसमें कई तरह की नौकरियां शामिल होती हैं जैसे डिलीवरी ट्रक मजदूर, खेती करने वाले मजदूर आदि और भी.

 

खाने का उत्पादन बढ़ता हैं :– चुकी इस खेती में उत्पादन की लागत काफी कम है, इसलिए किसान अधिक फसलों का उत्पादन करने में सक्षम होंगे. और इससे खाद्य सप्लाई की मांग में बढ़ोत्तरी भी होगी.

परंपरागत खेती के नुकसान (Conventional Farming Disadvantages)

 

यह मनुष्य के स्वास्थ्य एवं मिट्टी को नुकसान पहुंचाती है :- परंपरागत खेती में फसलों का उत्पादन करने के लिए जिन रासायनिक फ़र्टिलाइज़र एवं कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है. वे हानिकारक रसायन होते हैं जो सक्षम मिट्टी एवं फसलों पर प्रवेश कर जाते है, जिससे मनुष्यों को स्वास्थ्य सम्बंधित नुकसान तो होता ही हैं, साथ ही मिट्टी भी ख़राब होती है. इसके संबंधित लोगों का कहना है कि इस खेती में उगाई जाने वाली फसलों में 13 प्रकार के रसायन मौजूद होते हैं.

 

इससे जनवरों एवं पर्यावरण को भी खतरा हैं :- लोगों का कहना है कि इसमें जो रसायन एवं कीटनाशक का उपयोग किया जाता है उससे पर्यावरण को भी नुकसान होता है. खाद्य के उत्पादन में जानवरों का इस्तेमाल किया जाता है. इस खेती में उन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है, क्योकि ये जानवर बड़े पैमाने पर उत्पादित भोजन खाते है, जोकि उनको संभावित रूप से नुकसान पहुँचा सकता है.

 

छोटे किसानों को नुकसान है :- पारंपरिक खेती का इस्तेमाल नहीं करने वाले लोगों का कहना है कि यह विधि सस्ती और आकर्षक हैं, जिससे बड़े पैमाने पर खेती की जाती है. इसमें ओद्ध्योगिक एवं पारिवारिक दोनों खेती शामिल होती है. और उद्योग छोटे किसानों पर हावी हो जाते हैं, जिससे यह उनके लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.

 

कई देशों में पारंपरिक खेती पर प्रतिबन्ध लगा है :- कई देशों में जीएमओ फसलों और परंपरागत खेती पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है, जिससे उत्पाद की क्षमता सीमित हो जाती है.

परंपरागत खेती के कई फायदे हैं, परन्तु इसके कुछ नुकसान इनके लाभों को कम कर देते हैं. लेकिन इसकी कम लागत और अधिक उत्पादन की क्षमता के चलते यह अभी भी कई जगह पर काफी लोकप्रिय है.

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